(एम पी ग्रामीण न्यूज़ ,)
5 जून यानी विश्व पर्यावरण दिवस। यह दिन हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के साथ हमारा रिश्ता कितना गहरा है और इसे सहेजना हमारी कितनी बड़ी जिम्मेदारी है। आज जब पूरी दुनिया कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो रही है और प्रदूषण से जूझ रही है, तब जमीनी स्तर पर कमलाशंकर विश्वकर्मा और उनका 'विश्वकर्मा बैम्बू फार्म एंड बायोडायवर्सिटी पार्क' पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता (Biodiversity) को पुनर्जीवित करने का एक जीवंत उदाहरण पेश कर रहे हैं।
बांस 'हरा सोना' और पर्यावरण:
आमतौर पर लोग पेड़ लगाने की बात करते हैं, लेकिन कमलाशंकर विश्वकर्मा ने बांस को अपना मिशन बनाया। बांस को "हरा सोना" (Green Gold) कहा जाता है, और पर्यावरण को बचाने में इसकी क्षमताएं अद्भुत हैं:
ऑक्सीजन का महास्रोत: बांस अन्य पेड़ों की तुलना में लगभग 35% अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है और भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर वायुमंडल को शुद्ध करता है।
जल और मृदा संरक्षण: बांस की जड़ें मिट्टी को मजबूती से जकड़ कर रखती हैं, जिससे भूमि का कटाव (Soil Erosion) रुकता है और जमीन के भीतर पानी रुकने (Groundwater Recharge) में मदद मिलती है।
प्लास्टिक का विकल्प और ग्रीन रोजगार: फॉर्म द्वारा बांस के इको-फ्रेंडली उत्पाद बनाकर प्लास्टिक के कचरे को कम करने और स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है।
जैव विविधता का अनूठा ठिकाना: पक्षियों और तितलियों का संसार
'विश्वकर्मा बैम्बू फार्म एंड बायोडायवर्सिटी पार्क' सिर्फ बांस उगाने का केंद्र नहीं है, बल्कि यह एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बन चुका है। घने और सुरक्षित बांस के झुरमुटों (Bamboo Groves) ने वन्यजीवों, विशेषकर पक्षियों और रंग-बिरंगी तितलियों को एक सुरक्षित प्राकृतिक आवास प्रदान किया है।
1. चहकते पक्षी और प्राकृतिक आश्रय (Avian Diversity)
बांस के ऊंचे और सघन पेड़ पक्षियों के लिए घोंसला बनाने और छिपने के लिए सबसे सुरक्षित जगह माने जाते हैं। विश्वकर्मा बैम्बू फार्म एंड बायोडायवर्सिटी पार्क में विभिन्न प्रजातियों के स्थानीय और प्रवासी पक्षी डेरा जमाते हैं।
यहाँ सुबह-शाम गूंजने वाला पक्षियों का कलरव यह साबित करता है कि इंसानी प्रयासों से खोए हुए जंगलों को वापस पाया जा सकता है।
ये पक्षी न केवल फॉर्म की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि हानिकारक कीटों को खाकर एक प्राकृतिक कीट नियंत्रक (Natural Pest Control) का काम भी करते हैं।
2. तितलियों का रंगीन संसार (Butterfly Haven)
तितलियां किसी भी क्षेत्र के स्वस्थ पर्यावरण की संकेतक (Bio-indicators) होती हैं। विश्वकर्मा बैम्बू फार्म एंड बायोडायवर्सिटी पार्क का रसायन-मुक्त और शुद्ध वातावरण विभिन्न प्रकार की रंग-बिरंगी तितलियों को आकर्षित करता है।
बांस के पत्तों की ओस और आस-पास पनपी वनस्पतियां इन तितलियों के पनपने में मदद करती हैं।
तितलियों की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में परागकण (Pollination) की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे आस-पास के खेतों और पेड़-पौधों में भी हरियाली और पैदावार बढ़ती है।
"जैव विविधता ही जीवन का आधार है। जब हम बांस लगाते हैं, तो हम सिर्फ एक पौधा नहीं रोपते, बल्कि सैकड़ों पक्षियों, तितलियों और सूक्ष्मजीवों को एक नया जीवन और घर देते हैं।"
कमलाशंकर विश्वकर्मा जी के कार्यों से हमें यह सीख मिलती है कि पर्यावरण की रक्षा केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है। असली संरक्षण तब होता है जब हम ऐसा वातावरण तैयार करें जहाँ प्रकृति का हर जीव—चाहे वह छोटा सा कीट हो, तितली हो, या कोई पक्षी—सुरक्षित महसूस कर सके। जब किसी स्थान पर जैव विविधता समृद्ध होती है, तो वहाँ की मिट्टी, हवा और पानी अपने आप शुद्ध और दीर्घायु हो जाते हैं।
इस पर्यावरण दिवस पर हमारा संकल्प
आइए, इस 5 जून को 'विश्वकर्मा बैम्बू फार्म एंड बायोडायवर्सिटी पार्क' के इस बेहतरीन सफर से प्रेरणा लें और अपनी जीवनशैली में दो छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव करें:
एक पौधा अवश्य लगाएं: अपने घर या आस-पास एक पौधा (यदि संभव हो तो बांस या कोई औषधीय पौधा) जरूर लगाएं और उसकी जिम्मेदारी लें।
प्रकृति के सह-अस्तित्व को समझें: अपने घरों के बाहर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें और कीटनाशकों का प्रयोग कम से कम करें ताकि तितलियां और मित्र-कीट सुरक्षित रह सकें।
विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
*कमलाशंकर विश्वकर्मा, भाटखेड़ी*
मोबाइल नंबर7838960968