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श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का सात दिवसीय संगीतमय आयोजन महाप्रसादी के साथ संपन्न


महागढ़। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी श्रीराम राठौर धर्मशाला, महागढ़ में श्री गणेश उत्सव समिति एवं समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का गरिमामय माहौल में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन पूर्णाहुति के अवसर पर आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और महाप्रसादी ग्रहण की।

अधर्म के समय उठने वाली अंदर की आवाज ही 'कृष्ण' हैं: कुलदीप जी शर्मा कथा प्रवक्ता पूज्य श्री कुलदीप जी शर्मा (बांगरेड वाले) ने भागवत मर्म समझाते हुए कहा कि मनुष्य के भीतर धर्म और अधर्म दोनों प्रवृत्तियां निवास करती हैं। जब व्यक्ति के मन में अधर्म का भाव जागता है, तब उसकी आत्मा में उस गलत काम को न करने की एक लहर अवश्य उठती है।

उन्होंने जोर देकर कहा, "अधर्म करते समय मन बार-बार चेतावनी देता है कि जो कर रहे हो वह गलत है। यह अंदर की आवाज कोई साधारण बात नहीं, बल्कि हमारी चेतना में बैठे स्वयं श्रीकृष्ण की प्रेरणा है जो हमें सही राह दिखाती है। भगवान का यह वचन कि 'जब-जब धर्म की हानि होगी, तब-तब मैं प्रकट होऊंगा' इसी प्रेरणा और अनुभूति के रूप में हर मनुष्य के भीतर घटित होता है।"

सप्ताह भर गूंजे पौराणिक प्रसंग सात दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान में व्यासपीठ से कई अलौकिक प्रसंगों का सजीव वर्णन किया गया:

  • ज्ञान एवं भक्ति मार्ग: शुकदेव जी एवं राजा परीक्षित की ज्ञान चर्चा, विदुर चरित्र, प्रह्लाद चरित्र और समुद्र मंथन का सुंदर व्याख्यान।
  • उत्सव एवं लीलाएं: श्रीरामचरितमानस वर्णन, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, बाल लीलाएं, माखन चोरी, महारास, राधा-कृष्ण भक्ति महोत्सव तथा सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन।
  • मोक्ष कथा: अंतिम दिन परीक्षित मोक्ष के साथ कथा को विश्राम दिया गया।

क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना कथा के दौरान ग्रामवासियों और धर्मप्रेमी बंधुओं ने भगवान से क्षेत्र में भरपूर वर्षा, शांति और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस अवसर पर महागढ़ सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से आए हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।