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खाद की किल्लत: महागढ़ में छोटे किसान दर-दर भटकने को मजबूर, सोसाइटी में लिमिट खत्म होने से फसलों पर संकट


महागढ़ (मनासा)
क्षेत्र की ग्राम पंचायत महागढ़ में इन दिनों छोटे और सीमांत किसान खाद की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। गांव की सहकारी समिति (सोसाइटी) में कम जमीन होने के कारण छोटे किसानों की खाद की 'लिमिट' जल्द ही समाप्त दिखाई देती है। ऐसे में किसान खाद के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं, लेकिन उन्हें कहीं से राहत मिलती नजर नहीं आ रही।
ऑनलाइन दुकान पर नहीं बन रही पर्ची
सोसाइटी से मायूस होकर जब किसान प्राइवेट या ऑनलाइन दुकानों का रुख करते हैं, तो वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। ऑनलाइन सिस्टम में पर्ची (टोकन) न बनने के कारण छोटे किसान खाद खरीदने में असमर्थ हैं। न तो समिति से खाद मिल पा रही है और न ही खुले बाजार में कोई सुनवाई हो रही है।
"अगर समय पर यूरिया और डीएपी खाद नहीं मिली, तो हमारी फसलें चौपट हो जाएंगी। पैदावार आधी रह जाएगी। ऐसी स्थिति में हम अपने परिवार का गुजर-बसर कैसे करेंगे?"
— पीड़ित किसान, महागढ़
प्रमुख बिंदु एवं किसानों की मांग:
फसल की बुआई/सिंचाई प्रभावित: सही समय पर खाद न मिलने से पौधों का विकास रुक जाएगा, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
पारिवारिक संकट: छोटे किसानों की आजीविका पूरी तरह से इन्हीं छोटी जोत की फसलों पर टिकी है।
प्रशासन से गुहार: किसानों ने शासन-प्रशासन और कृषि विभाग के आला अधिकारियों से मांग की है कि छोटे काश्तकारों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें बिना किसी जटिल प्रक्रिया के समय पर पर्याप्त खाद मिल सके।
संपादकीय टिप्पणी / निष्कर्ष
अन्नदाता कहे जाने वाले छोटे किसानों को अगर एक बोरी खाद के लिए भी प्रशासनिक चक्कर काटने पड़ें, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। संबंधित अधिकारियों को महागढ़ सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तुरंत संज्ञान लेकर अतिरिक्त खाद वितरण केंद्र की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसानों का नुकसान होने से बचाया जा सके।